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Prince(betu) ki daily life

 यह पोस्ट मेरे खुद की लाइफ से जुड़ा हुआ है ,यानी मेरे साथ मेरा भतीजा रहता है पहली बार शहर में पढ़ाई करने आता है तो अपना जीवन कैसे जीता है उसी के बारे में उसकनकुछ यादगार पल का इसमें लिखा जाएगा।
सबसे पहले हम इसका जन्मदिन जानते हैं इसका जन्म 11 जून 2014 को हुआ था और यह गांव में ही उनके बचपन गांव में ह गुजरे इसके बाद यह अपने बचपन की पढ़ाई यानी एक से पांच तक शासकीय प्राथमिक पाठशाला गड़वानी में ही पांचवी तक पढ़ाई की जब यह चौथी क्लास में था तभी से मैंने इसको नवोदय की तैयारी यानी जवाहर नवोदय विद्यालयकी तैयारी करना चाहा इसलिए इसको मैं बनारस से 40-45 किलोमीटर दूर लगभग एक चंदौली जिला करके वहीं पर मैं इसका एडमिशन हॉस्टल में कराया है उसेहस्टल में नवोदय विद्यालय की तैयारी कराई जाती थी लेकिन यह घर में सबसे छोटा था यानी अपने पिताजी का एक ही लड़का तो यह हॉस्टल में नहीं रुक पाया फिर यह घर में फोन करता है ।और बोलता है कि मैं यहां नहीं रहूंगा फिर हम लोग गांव से बोलोरो गाड़ी बुक करके घर पर ले आए ।

इसके बाद प्रयागराज में  हम पहले से पढ़ाई कर रहे थे इसको मैं अप्रैल में चौथी क्लास मे पढ़ाई कर रहा था। तभी मैं अप्रैल महीने में अपने रूम प्रयागराज में बुलाकर तैयारी करवा दी नवोदय की या पढ़ने में दिमाग था हर बच्चे का दिमाग रहता है लेकिन जिस बच्चे को प्रॉपर सही गाइडेंस मिल जाता है वह पढ़ने लगता है।

इसके बाद ज्यादा गर्मी पड़ने लगी मई–जून में तो मैंने इसको घर भेज दिया गांव में इसके बाद फिर जुलाई से मैं यहां पर अपने रूम में ले आया उसको इसके बाद इसको सही तरीके से हम और हमारे भाई इसको नवोदय का पढ़ा मैंने इसके बाद इसका सिलेक्शन भी हो गया था जेएनवी में लेकिन फॉर्म भरवाने में थोड़ी सी गलती हो गई थी इसकी वजह से इसका एडमिशन नहीं हुआ तबीयत काफी दिन निराश हुआ करता था कि मेरा एडमिशन जेएनवी में नहीं हुआ , इसके बाद हम लोग खुद कक्षा सातवीं मे इसको प्रयागराज बुला लिए और यहीं पर एडमिशन करा दिया अब आराम से स्कूल जाने लगा और पढ़ाई करने लगा यह  है कि इसके लिए सुबह ही खाना बनाना पड़ता जल्दी ।


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